गुजरात के गांधीनगर के रुपाल गांव में हर साल नवरात्रि की आखरी रात घी की नदियां बहती है।

गुजरात के गांधीनगर के रुपाल गांव में हर साल नवरात्रि की आखरी रात घी की नदियां बहती है।

लंकेश चक्रवर्ती साहब अपने आपमें ही एक संस्था है। पिछले 27 सालो से अविरत अंधश्रध्धा विरुध्ध और जनजागरण के तहत पल्ली परिवर्तन अभियान चला रहे है। पियुश जादुगर जैसे रेशनल साथीओ के साथ मिलकर वो निरंतर प्रवृत्तिशील रहे है।

गुजरात के गांधीनगर के रुपाल गांव में हर साल नवरात्रि की आखरी रात घी की नदियां बहती है। आस्था और मन्नत के नाम पर लोग यथाशक्ति शुध्ध घी माताजी को चडाते है। चडाया हुआ घी रास्तों पर बहता है, धूल मिट्टी और गंदकी में मिल कर वो अखाध्य बन जाता है। उस घी को फिर स्थानिक दलित ले जाते है और गर्म करके वापस युज करते है जो कि अनहाईजेनीक है।

आस्था के नाम पर करोडो रुपये का घी वेस्ट करने से बहेतर है कि उस घी को ईकठ्ठा कर प्रसाद बनाया जाए और बांटा जाए। उस घी को बेच कर गांव के विकास के भी काम हो सकते है।

ईन्ही मांगो के साथ आज पल्ली परिवर्तन अभियान, मुंबई गुजरात रेशनालिस्ट एसो. , मानव अधिकार आंदोलन समिति और भीम फाउन्डेशन (नरोडा) के साथीओने मिलकर अपने अपने आवेदनपत्र अहमदाबाद और गांधीनगर के कलेक्टर साहब को दिए। उन्होने हमें आश्वस्थ किया है कि पल्ली कमिटी से ईस बारे में जरुर बात की जायेगी कि ईस घी का वेस्टेज ना हो।

आगे भी हम मिलकर धरणां व दुसरे कार्यक्रम करेंगे ता कि लोग जागरुक हो, दशहरे तक अलग अलग कार्यक्रम होंगे, आप लोगो के सहकार की उम्मीद है।

27 सालो से चली आ रही ईस लडाई में जीत काफी मुश्किल है पर नामुमकीन नही। आने वाले सालो में भी हम ईसी तरह पल्ली परिवर्तन अभियान के तहत लडते रहेंगे।

लंकेश चक्रवर्ती साहब, आप के प्रयासो को हम सलाम करते है और #MAAS (मानव अधिकार आंदोलन समिति) की और से मै आपको वादा करता हुं की रेशनालिटी के प्रचार प्रसार के आपके आंदोलन को मेरा और दुसरी साथी संस्थाओ में रहे मेरे दोस्तो का हमेंशा सहकार मिलेगा।

 

एससी/ओबीसी एकता को मजबुत करने के लिए हमारी एक छोटी सी कोशीश

एससी/ओबीसी एकता को मजबुत करने के लिए हमारी एक छोटी सी कोशीश

एससी/ओबीसी एकता को मजबुत करने के लिए हमारी एक छोटी सी कोशीश को सहयोग देने के लिए दोनो कौम के सभी कर्मशीलो का धन्यवाद।

माधुपुरा में हुए दंगे पर दोनो कौम के स्थानिकोने पोजीटीव एप्रोच के साथ सहयोग देने की तैयारी बताई है।

शराब के स्थानिक अड्डे ही सारी मुसीबत की जड है ये नतीजा निकाल कर हमने डिसाईड क्या है कि ये गलत धंधे बंद हो उस पर काम करेंगे।

Pragnesh Leuva, Hemant Poonamben Dalpatbhai, Parth S Sonara, મનિષ ભારતીય, અર્થ, Gautam Parmar, Pinakin Parmar, महेश जी. परमार, Mukesh Parmar, Kalpesh Nanduben Jagdish Bhai, Rakesh Vaghela, Chirag Parmar, Sagar Aagja, राजेश नाडीया, जशुभाई नाडीया तथा स्थानिक दस दलित युवक व ठाकोर समाज की और से जगतसिंह ठाकोर, Alpesh Thakor व उनकी टीम तथा स्थानिक ठाकोर युवको का तहे दिल से धन्यवाद।

एक कदम दोस्ती की और।

#MAAS

मार डाला गणपति ने..

मार डाला गणपति ने..

कल अहमदाबाद के गीरधरनगर विस्तारके स्लम क्वार्टर्स में आमने सामने के दो फ्लेट्स के वाल्मिकी परिवारो ने अपने यहां दस दिन तक स्थापित किए गणपति को विसर्जीत करने के लिए डी.जे का तामझाम कीया था।

ईनमें से एक क्रिमीनल गुटने दुसरो को अपने डी.जे व नासिक बेन्ड की आवाज कम करने को लेकर झगडा कीया। बात बढ गई तो तलवारो के साथ हमला किया।

दो लोगो को देखते ही देखते काट डाला गणपति के भक्तो ने।

बीस सालके निलेश के. वाघेला ने तो अभी जीना शुरु भी नही किया था, विधवा मां का एक लौता सहारा था वो।

58 सालके अशोक जी. सोलंकी अपने दो बेटे-बहु, बेटी व परिवार के महत्वपूर्ण सदस्य थे, म्यु.कोर्पो में नौकरी करते थे वो।

दारु व गांजा बेचने वाले क्रिमीनल परिवार के खिलाफ पुलीसने अगर पहले ही सख्त एक्शन लिए होते तो आज ये लोग जिंदा होते ऐसा स्थानिको का कहना है।

MAAS की टीम की और से मै, Parth S Sonara और गिरधरनगर के स्थानिक दोस्त राजु पटेल घटनास्थल की मुलाकात लेने गये तब घटना के बारे में जानकर और अभीतक ताजा खून के छींटे जगह जगह देखकर हमारी आंखे नम हो गई।

यहां दोनो तरफ के लोग वाल्मिकी है तो ईस घटनामें किसीको ज्यादा ईन्टरेस्ट ना हो लेकिन हम हर पीडित और शोषित के पक्ष में खडे रहेंगे चाहे वो धार्मिक ही क्यों न हो।

मुझे उम्मीद है कि अगले साल ईस स्लम क्वार्टर्स में कम से कम गणपति स्थापन और विसर्जन नही होगा।